राजस्थान का यह सपूत, आज राष्ट्रपति पुलिस पदक से होंगे सम्मानित

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जयपुर/बाड़मेर. माओवादियों (Maoists) के लिए काल के नाम से मशहूर सशस्त्र सीमा बल (SSB) के डिप्टी कमांडेंट नरपत सिंह राजपुरोहित (Narpat Singh Rajpurohit) को उनके अदम्य साहस एवं पराक्रम के लिए राजधानी दिल्ली (Delhi) में आयोजित गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मुख्य समारोह में रविवार को राष्ट्रपति पुलिस पदक (President’s Police Medal) से सम्मानित किया जाएगा. अपने अदम्य साहस और पराक्रम के लिए इससे पूर्व भी नरपत सिंह कई मर्तबा सम्मानित हो चुके हैं.

झारखंड के माओवादी प्रभावित इलाके में तैनात हैं
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के दौरान डिप्टी कमांडेंट नरपत सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित करेंगे. राष्ट्रपति पुलिस पदक के साथ उन्हें छह लाख रुपए नकद, इंदिरा गांधी नहर के द्वितीय चरण में 25 बीघा भूमि अथवा जमीन के एवज में चार लाख रुपए नकद देकर सम्मानित किया जाएगा. बाड़मेर के ढोक निवासी नरपत सिंह अपनी बटालियन के हीरो कहे जाते हैं. मौजूदा समय में वे झारखंड के माओवादी प्रभावित इलाके में तैनात हैं.

8 माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी महेन्द्र प्रताप सिंह भाटी बताते हैं कि अपने अदम्य साहस से दुश्मनों को धूल चटाने में सबसे आगे रहने वाले नरपत सिंह ने कुछ समय पहले ही अपनी जान जोखिम में डालकर 8 माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया था. झारखंड एवं ओडिशा के माओवाद प्रभावित इलाकों में उनके खौफ से या तो माओवादी समर्पण कर रहे हैं या फिर वे इलाका ही छोड़ रहे हैं. एसएसबी की 18वीं वाहिनी में तैनात नरपत सिंह की कार्यशैली के उच्च अधिकारी भी कायल हैं.

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जंगलों में देश के दुश्मनों को ढूंढ़ते फिरते हैं
इस बहादुर की देश सेवा के जज्बे को लेकर तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें सम्मानित किया था. मौजूदा समय में नरपत सिंह सिर्फ अपनी बटालियन ही नहीं, बल्कि देश की 1751 किमी सीमा की निगरानी करने वाली एसएसबी के हीरो हैं. वे अक्सर झारखंड के जंगलों में देश के दुश्मनों को ढूंढ़ते फिरते हैं. डिप्टी कमांडेंट नरपत सिंह के मुताबिक माओवादियों का सबसे बड़ा हथियार है गुरिल्ला युद्ध. लेकिन एसएसबी उसका जवाब तूफानी अंदाज में देती है. नरपत सिंह की टीम सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं करती, बल्कि उन्हें जिंदा भी पकड़ती है। उनकी टीम 8 हार्डकोर माओवादियों को पकड़ चुकी है.