प्रदेश में 14 माह में 1844 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कई बार कहा है कि ‘मेरी कलम हमेशा जनहित में चलती रहेगी।‘ हमारी सरकार जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील नजरिए से फैसले लेती रहेगी। विगत एक वर्ष से अधिक समय में गहलोत ने ऎसे कई निर्णय किए हैं जिनसे आमजन को सीधा लाभ मिला है। इन्हीं में से एक निर्णय अनुकंपा नियुक्तियों से संबंधित है जिनमें मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अनुकम्पात्मक नियुक्तियों में किसी तरह की देरी न हो। विशेष परिस्थितियों में उन्होंने पूरी सदाशयता दिखाते हुए नियमों में शिथिलता भी दी है।

केस-एक

झोटवाड़ा तहसील के नांगल जैसा बोहरा निवासी वाहन चालक मदनलाल कुमावत की सरकारी सेवा में रहते हुए मृत्यु हो गई। उनके परिवार में पत्नी गेंदा देवी, एक अविवाहित मानसिक दिव्यांग पुत्र तथा एक विधवा पुत्रवधू ललिता पर मानो दुख का पहाड़ टूट पड़ा और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी आन पड़ी।

इस मामले में मृतक की पत्नी गेंदा देवी बीमार रहने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के लिए असमर्थ थी। इसी प्रकार पुत्र मानसिक दिव्यांग होने के कारण सरकारी सेवा के योग्य नहीं था। वहीं पुत्रवधू के अनुकम्पा नियुक्ति की श्रेणी में नहीं आने के कारण परिवार के सामने विकट स्थिति पैदा हो गई कि आजीविका कैसे चले। ऎसे में दुखी परिवार ने मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के समक्ष गुहार लगाई कि परिवार के जीवन-यापन के लिए नियमों में शिथिलता प्रदान कर पुत्रवधू को मृतक आश्रित की श्रेणी में मानते हुए सरकारी नौकरी दी जाए।

गहलोत ने व्यथित परिवार की पीड़ा को समझा और मानवीयता दिखाते हुए पुत्रवधु को नियुक्ति देने जैसा संवेदनशील निर्णय किया। टूट चुके परिवार को मुख्यमंत्री के इस निर्णय से फिर संबल मिला है।

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केस-दो

राज्य कर्मचारी धन्नाराम बैरवा की राजकीय सेवा में रहते हुए मृत्यु हो गई। धन्नाराम के परिवार में दो पुत्र, एक पुत्री एवं विधवा पत्नी विधिक वारिस के रूप में हैं लेकिन पुत्री विवाहित होने, छोटा पुत्र मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी से पीड़ित होने तथा पत्नी बीमार रहने के कारण राजकीय सेवा के योग्य नहीं थे। सबसे बड़े पुत्र धर्मवीर कुंडारा के दो से अधिक संतान होने के कारण वह भी अनुकंपा नियुक्ति के योग्य नहीं था। ऎसी स्थिति में परिवार के सामने छोटे पुत्र एवं विधवा पत्नी की बीमारी के खर्च के साथ ही पूरे परिवार के गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया।

मुख्यमंत्री के समक्ष जब यह मामला आया तो उन्होंने धन्नाराम बैरवा की विषम पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तत्काल नियमों में शिथिलता प्रदान करने के आदेश दिए। उन्होंने सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेते हुए बड़े पुत्र धर्मवीर कुंडारा को दो से अधिक संतान होने के बावजूद सरकारी सेवा में नियुक्त किए जाने के निर्देश दिए।

गहलोत की संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि मात्र 14 महीने में करीब 70 विभागों में 1844 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्तियां दी गई हैं। इसमें भी बड़ी बात यह है कि 405 प्रकरणों में नियमों में शिथिलता प्रदान कर जरूरतमंद परिवारों के आश्रितों को जीविका का संबल दिया गया है। इसी के साथ उन्होंने 3600 ग्रेड पे तक की राजकीय सेवाओं में पात्रतानुसार अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्णय को फिर बहाल किया है। पूर्व में केवल 2800 ग्रेड-पे तक के पदों पर ही अनुकंपा नियुक्तियां दी जा रही थीं।