विभाग ने वसूले 5 लाख रुपये! झुंझुनूं में भत्ते के लिए गलत दस्तावेज लगा रहे हैं बेरोजगार युवा

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झुंझुनूं: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  ने अपनी चुनावी घोषणा को पूरा करते हुए युवा बेरोजगारों को भत्ता देना तो शुरू कर दिया लेकिन युवा इस भत्ते के खातिर गलत रास्ता भी अख्तियार कर रहे हैं.

यह झुंझुनूं में हुई जांच में सामने आया, जहां अब तक उन युवाओं से करीब पांच लाख रुपये वसूले गए हैं, जिन्होंने गलत जानकारी और दस्तावेज लगाकर सरकारी योजना का लाभ लिया है.

सवाल यह है कि झुंझुनूं में तो इसकी जांच शुरू हो गई है लेकिन यदि पूरे प्रदेश में इसकी जांच होती है तो कितने ही वास्तविक युवाओं को हक इन्होंने मार लिया है.

सैकड़ों की संख्या में फर्जी युवाओं को पकड़ा गया
गहलोत सरकार ने सत्ता संभालने के साथ ही कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री युवा संबल योजना की शुरूआत की थी, जिसमें युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है लेकिन झुंझुनूं में हुई एक जांच में खुलासा हुआ है कि इस भत्ते को पाने के लिए कई ऐसे युवा भी हैं, जिन्होंने पात्रता को दरकिनार करते हुए फर्जी तरीके से खुद को पात्र बनाया और बेरोजगारी भत्ता लिया लेकिन अब ये पकड़े गए हैं. झुंझुनूं में अब तक सैकड़ों की संख्या में फर्जी युवाओं को पकड़ा गया है.

छोटे से लाभ के लिए युवा बेरोजगार गलत रास्ते पर 
जिला रोजगार अधिकारी दयानंद यादव ने बताया कि एक छोटे से लाभ के लिए युवा बेरोजगार गलत रास्ते पर है, जिसके कारण उनके करियर को भी खतरा है. उन्होंने कहा कि जिस नियम-कायदों के साथ इस योजना को शुरू किया गया था. उसी के हिसाब से यदि युवा बेरोजगारी भत्ता ले तो ये उनके लिए फायदेमंद होगा और साथ ही सरकार की मंशा भी पूरी होगी अन्यथा उनके खिलाफ न केवल वसूली बल्कि कानूनन कार्रवाई के तहत भी कदम उठाए जाने प्रस्तावित है.

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फर्जी बेरोजगार बने हर एक युवा से वसूली की जाए
झुंझुनूं की बात करें तो अब तक विभाग सैकड़ों की संख्या में युवाओं से पांच लाख रुपये वसूल चुका है, वहीं, इतने ही पैसों की और वसूली के लिए लगातार फर्जी बेरोजगार बनें युवाओं को फोन और मैसेज के जरिए सूचना दी जा रही है. जिला रोजगार अधिकारी दयानंद यादव ने बताया कि विभाग ने तय किया है कि फर्जी बेरोजगार बने हर एक युवा से वसूली की जाए. वहीं, यदि जो युवा इसके बाद भी दोबारा फर्जीवाड़े की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ दंडानात्मक कार्रवाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता.

कहते हैं कि पड़ोसी का असर एक पड़ोसी पर जरूर पड़ता है. दरअसल, झुंझुनूं में श्रम कल्याण अधिकारी कार्यालय और रोजगार अधिकारी कार्यालय, एक ही भवन में है. श्रम कल्याण अधिकारी कार्यालय, हमेशा से ही अपने फर्जीवाड़े के लिए सुर्खियों में रहा है लेकिन अब इसका असर एक पड़ोसी रोजगार अधिकारी कार्यालय पर भी पड़ने लगा है, पहली बार होगा.

जब रोजगार अधिकारी कार्यालयों को भी युवाओं के डॉक्यूमेंट्स इसलिए जांच करने पड़ रहे हैं कि उन्होंने फर्जीवाड़ा किया है. न कि इसलिए कि उन्हें कहीं रोजगार देना है. बहरहाल, देखने वाली बात यह होगी कि आखिरकार इस फर्जीवाड़े के रैकेट तक विभाग या सरकार पहुंच पाती है या नहीं.