शिवराज सरकार ने आरक्षण देने का किया ऐलान, कानून के जानकार ने कहा- ये राज्य का अधिकार नहीं

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मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और सेवाओं में सिर्फ राज्य के निवासी युवाओं को अवसर देने के शिवराज सरकार के ऐलान पर कानून के जानकारों ने आपत्ति दर्ज कराई है. इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ क्रिमिनल जस्टिस के स्थाई वकील दीपक आनन्द मसीह का कहना है कि राज्य सरकार के अधिकार में ये करना है ही नहीं.

वकील दीपक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के डॉ. प्रदीप जैन सहित कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की श्रृंखला है, जिनमें कोर्ट ने राज्य सरकारों के ऐसे प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है. मसीह के मुताबिक, राज्य सरकारें सरकारी नौकरियों के लिए तय शर्तों और मानदंडों में डोमिसाइल यानि स्थाई निवासी को प्राथमिकता का कोई मानक बना सकते हैं, लेकिन होल्सम यानी शत प्रतिशत इसके आधार पर प्रावधान तय नहीं कर सकते.

क्या है शिवराज सरकार का ऐलान

आज सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, अपने भांजे-भांजियों के हित को ध्यान में रखते हुए हमने निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश में शासकीय नौकरियां अब सिर्फ मध्यप्रदेश के बच्चों को ही दी जाएंगी. इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान किया जा रहा है. प्रदेश के संसाधनों पर प्रदेश के बच्चों का अधिकार है.’

कमलनाथ ने क्या कहा

पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा, ‘शिवराज सरकार 15 साल बाद नींद से जारी है. प्रदेश के युवाओं के हक़ के साथ पिछले 15 वर्ष की तरह वर्तमान में भी छलावा ना हो , वे ठगे ना जाये , यह आगामी उपचुनावों को देखते हुए मात्र चुनावी घोषणा बन कर ना रह जाये , इस बात का ध्यान रखा जावे अन्यथा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी.’

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पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा, ‘क्लर्क व चपरासी की नौकरी तक के लिये हजारों डिग्री धारी लाइनों में लगते रहे. मज़दूरों व ग़रीबों के आंकड़े इसकी वास्तविकता खुद बयां कर रहे हैं. अपनी पिछली 15 वर्ष की सरकार में कितने युवाओं को आपकी सरकार ने रोजगार दिया, यह भी पहले आपको सामने लाना चाहिये.’