दिल्ली हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत के बाद परिजन नाराज

0
92

सीकर: दिल्ली हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत के बाद परिजन नाराज हैं. दिवंगत पुलिसकर्मी के परिजन और स्थानीय ग्रामीण सीकर जिले के सदीनसर गांव के पास सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं. कांस्टेबल रतनलाल के शव के साथ ये प्रदर्शन चल रहा है. इस दौरान ग्रामीणों ने रास्ता भी जाम किया है.

ग्रामीणों की मांग है कि पुलिसकर्मी रतन लाल को शहीद का दर्जा दिया जाए. जानकारी के लिए बता दें, हेड कॉन्स्टेबल का पैतृक गांव में उनके शव का अंतिम संस्कार होने जा रहा है. प्रदर्शन स्थल से उनके गांव की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है.

शव पैतृक गांव पहुंचने से पहले हो रहा प्रदर्शन

दिल्ली पुलिस में कार्यरत रतन लाल सीकर जिले के तिहावली गांव के रहने वाले थे. दिल्ली से उनका शव उनके पैतृक गांव तिहावली जा रहा था. इससे पहले ही सदीनसरसर गांव के पास ग्रामीणों ने इसे रोक लिया. पुलिसकर्मी को शहीद का दर्जा देने की मांग की जा रही है.

इस मांग को लेकर ग्रामीणों ने फतेहपुर-झुंझुनू मार्ग को जाम कर दिया है. प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि जब तक रतन लाल गुर्जर को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे.

गोकुलपुरी के एसीपी ऑफिस में थे तैनात
दिल्ली के गोकुलपुरी एसीपी ऑफिस में तैनात हेड कांस्टेबल रतन लाल को अपनी जान हिंसा के दौरान गंवानी पड़ी. दिल्ली के गोकुलपुरी थाना क्षेत्र के मौजपुर में वो पत्थरबाजी के दौरान घायल हो गए थे. राजस्थान के सीकर के रहने वाले रतन लाल ने 1998 में दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर नियुक्त हुए थे. घटना के दौरान वो गोकुलपुरी एसीपी के ऑफिस में नियुक्त थे. जानकारी के अनुसार, वे यहां अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ रहते थे.

READ More...  राजस्थान में सार्वजनिक स्थल 31 मार्च तक बंद, 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी

स्टेडियम का नामकरण करने की उठी मांग
दरअसल, दिल्ली पुलिस में नौकरी करने वाले रतन लाल की मां संतरा देवी और भाई दिनेश गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं. उनके दिवंगत होने के बाद ग्रामीण ने गांव के स्कूल के एक स्टेडियम का नामकरण करने की मांग कर रहे हैं.

गांव में छाई है शोक की लहर
सीएए के विरोधी और समर्थकों के बीच पथराव के बाद सोमवार को हिंसा हुई थी. इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले हेड कांस्टेबल रतन लाल सहित 4 लोगों को जान गंवानी पड़ी. इसकी जानकारी उनके पैतृक गांव तिहावली में परिजनों को मिलने के बाद पूरे गांव में शोक की लहर छा गई. जानकारी मिलने के बाद गांव के युवक रतन लाल के घर के पास जमा हो गए थे. परिजनों ने बताया था कि दो दिन पहले ही रतन लाल ने अपनी मां से फोन कर बात की थी. बातचीत के दौरान उसने होली के दौरान गांव में आने को कहा था.