जानिए कहां फंसी है कहानी नेपाल की? नेपाल में डैम न होना बन रहा है बिहार के डैमेज की वजह

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नेपाल में बांध का कार्य न शुरू होने की वजह से बिहार में बाढ़ के हालात लगातार उत्पन्न हो रहे हैं. देश में बाढ़ के हालात का आंकलन करने वाली एजेंसी सेंट्रल वॉटर कमिशन का ऐसा मानना है.

नई दिल्ली. नेपाल में बांध का कार्य न शुरू होने की वजह से बिहार में बाढ़ के हालात लगातार उत्पन्न हो रहे हैं. देश में बाढ़ के हालात का आंकलन करने वाली एजेंसी सेंट्रल वॉटर कमिशन का ऐसा मानना है. सीडब्ल्यूसी के मुताबिक बिहार के 24 जिले फिलहाल बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं और इस लिहाज से राज्य की स्थिति चिंताजनक है. बिहार के करीब एक दर्जन जिले जो कि भारत नेपाल सीमा से सटे हैं वहां हर साल बाढ़ आती है. नेपाल में कुछ बांध बनने हैं जिसका फायदा यह होगा कि नेपाल की नदियों का पानी वहां के बांध में रुक जाए और बिहार के जिलों में यह न घुस सके. इसमें से पंचकोशी, कोसी, बागमती डैम प्रमुख हैं. लेकिन उन बांध पर निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका है जिस वजह से हर साल की तरह इस साल भी बहुत ज्यादा पानी भारत में घुस चुका है.

बांध का विस्तृत खाका है तैयार
नेपाल के कारण बिहार में पैदा हुए बाढ़ के हालातों पर न्यूज18 इंडिया ने सेंट्रल वाटर कमीशन के चेयरमैन आर के जैन से बातचीत की. इस खास बातचीत में उन्होंने भारत-नेपाल के बीच में बाढ़ को लेकर जो समझौता हुआ है उसकी जानकारी दी. जिसके मुताबिक दोनों देशों के बीच यह सहमति बन चुकी है कि नेपाल अपने यहां महत्वपूर्ण नदियों पर बांध बनाएगा ताकि बरसात का पानी उसमें इकट्ठा हो सके. किस तरीके से इन बांध को बनना है इसका असर दोनों देशों के बीच यानी भारत और नेपाल पर क्या होगा और कब तक इनको बन जाना है इस पर एक विस्तृत खाका बनाया जा चुका है.

डैम बन जाएंगे तो डैमेज होगा कम
सेंट्रल वॉटर कमिशन के मुताबिक बिहार में फिलहाल तीन ऐसी जगह है जहां पर अब तक बाढ़ का स्तर सबसे ज्यादा है. 24 जगहों पर नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. उन्होंने कहा कि बिहार में हालात अभी बाढ़ के लिहाज से खराब हैं. मुजफ्फरपुर, दरभंगा में हालात बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं. बाढ़ की स्थिति की लगातार आंकलन कर रही इस एजेंसी का मानना है कि नेपाल में इतने बड़े बांध नहीं है जिस वजह से वहां पानी रोका जाए, नेपाल सरकार से इस मामले में बातचीत चल रही है, अगर वहां पर डैम बन जाएंगे तो डैमेज बहुत कम होगा, अभी नेपाल सरकार से विचार-विमर्श चल रहा है.

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इससे पहले गृह मंत्रालय ने देश की अलग-अलग एजेंसियों के साथ बाढ़ के हालातों को लेकर चर्चा की थी. इस बैठक में सेंट्रल वॉटर कमिशन को निर्देश दिए गए थे कि बाढ़ के पानी का बेहतर तरीके से प्रबंधन हो और केंद्र सरकार और राज्य सरकार बेहतर समन्वय से फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम पर काम करें. हालाकि बाढ़ प्रबंधन राज्य सरकार का दायित्व है, लेकिन बाढ़ के हालात का आंकलन कर रहे सेंट्रल वाटर कमीशन के मुताबिक नेपाल में अगर डैम बन जाए और फ्लड मैनेजमेंट स्कीम का प्रभावी ढंग से लागू होना यह कदम है बाढ़ की स्थिति का मुकाबला करने के लिए.