लोन मोरेटोरियम अवधि बढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई, क्या ब्याज पर मिलेगी राहत?

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सुप्रीम कोर्ट में लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई चल रही है. देखना यह है कि मोरेटोरियम के दौरान वसूलने वाले ब्याज पर सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत मिलती है या नहीं. लोगों की नजर इस बात पर भी है कि सुप्रीम कोर्ट मोरेटोरियम अवधि बढ़ाने पर कोई निर्णय लेता है या नहीं.

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील जबरदस्त दलीलें दे रहे हैं. याचिककर्ताओं के वकील राजीव दत्ता ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का हलफनामा बांचते हुए कहा कि ये तो साफ कह रहे हैं कि मोरीटरियम की अवधि निकलने के बाद वो अतिरिक्त EMI वसूलेंगे. उन्होंने कहा कि बैंक जब कॉमर्शियल संस्था हैं तो रिजर्व बैंक कोरोना के बीच उन्हें बचाने की कोशिश क्यों कर रहा है.

लोन मोरेटोरियम पर सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दिया है. सरकार ने यह संकेत दिया है कि मोरेटोरियम को दो साल तक बढ़ाया जा सकता है. लेकिन यह कुछ ही सेक्टर को मिलेगा. केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि ब्याज पर ब्याज के मामले पर रिजर्व बैंक निर्णय लेगा. सरकार ने सूची सौंपी है कि किन सेक्टर को आगे राहत दी जा सकती है. सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘हम ऐसे सेक्टर की पहचान कर रहे हैं जिनको राहत दी जा सकती है, यह देखते हुए कि उनको कितना नुकसान हुआ है.’ इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अब और देर नहीं की जा सकती.

कोविड-19 महामारी के मद्देनजर, आरबीआई ने 27 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें बैंकों को तीन महीने की अवधि के लिए किश्तों के भुगतान के लिए मोहलत दी गई थी.  22 मई को, RBI ने 31 अगस्त तक के लिए तीन महीने की मोहलत की अवधि बढ़ाने की घोषणा की, नतीजतन लोन EMI पर छह महीने के लिए ये मोहलत बन गई.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि बैंक EMI पर मोहलत देने के साथ- साथ ब्याज लगा रहे हैं जो कि गैरकानूनी है. ईएमआई का ज्यादातर हिस्सा ब्याज का ही होता है और इस पर भी बैंक ब्याज लगा रहे हैं. यानी ब्याज पर भी ब्याज लिया जा रहा है. इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI और केंद्र से जवाब मांगा था.

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इस बारे में याचिका दायर करने वाले के वकील राजीव दत्ता ने कहा कि 27 मार्च 2020 को कोविड 19 के राहत पैकेज के तहत लोगों के कर्ज ईएमआई में राहत देने के लिए उपाय किये गये थे. इस बारे में सभी बैंकों और सहकारी संस्थाओं को निर्देश जारी किये गये थे. इन संस्थाओं ने मोरेटोरियम दिया भी, लेकिन रिजर्व बैंक ने इस बात की छूट दी कि बैंक मोरेटोरियम के दौरान लोन पर ब्याज लगाना जारी रखें. उन्होंने कहा कि पूरा देश कोरोना संकट से प्रभावित है और सरकार कह रही है कि लोन के रीस्ट्रक्चरिंग की सुविधा दी जाएगी. यह पर्याप्त नहीं है. लोगों को इस तरह से दंडित नहीं किया जा सकता.

दत्ता ने कहा, ‘उनका कहना है कि मोरेटोरियम अवधि बढ़ाने से बैंकों को नुकसान होगा. लेकिन रिजर्व बैंक एक रेगुलेटर के रूप में तब क्यों नहीं जगता है जब अपराधी करोड़ों रुपये लेकर देश से फरार हो जाते हैं.’ उन्होंने कहा कि बैंक जब कॉमर्शियल संस्था हैं तो रिजर्व बैंक कोरोना के बीच उन्हें बचाने की कोशिश क्यों कर रहा है. सरकार को बैंकों को बचाने की जगह जनता को बचाने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले 5 महीने में सिर्फ किरानावालों को फायदा हुआ है.

इसके पहले पिछले हफ्ते इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रति सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि लोन मोरेटोरियम के मामले में वह अपना रुख स्पष्ट करने के लिए जल्द हलफनामा दे और रिजर्व बैंक के पीछे छुपकर अपने को बचाये नहीं.

लोन मोरेटोरियम यानी कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए मिली मोहलत के दौरान ब्याज माफी के अनुरोध वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अर्थव्यवस्था में समस्या सरकार के लॉकडाउन की वजह से आई है.